Iran Israel war: जानिए इस युद्ध से भारत और पाकिस्तान पर कैसे होंगा असर

Iran Israel war: जानिए इस युद्ध से भारत और पाकिस्तान पर कैसे होंगा असर 

हम सब लोग जानते हैं कि इस वक्त पश्चिम एशिया फिर से युद्ध करने के लिए तैयार हो चुका है। ईरान (Iran) और इज़राइल के बीच जो टकराव था, वह अब महेश टकराव न होकर युद्ध में परिवर्तित हो चुका है। इस वक्त पश्चिम एशिया का पूरा क्षेत्र प्रत्येक ड्रोन हमले और मिसाइल की वजह से अस्थिर हो चुका है। 

इस लड़ाई की बात करें तो यह लड़ाई सिर्फ दो देशों के बीच होने वाली कोई लड़ाई नहीं है बल्कि पूरे वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को भी बिगाड़ रही है। और सिर्फ यही नहीं बल्कि इसका सीधा असर समुद्री व्यापार मार्गों और तेल की आपूर्ति और दक्षिण एशिया तक हर जगह इसकी वजह से हो रही राजनीति दिखाई दे रही है। मुख्य रूप से पाकिस्तान और भारत जैसे देश के लिए ये Middle East Crisis यह बेहद ही ज्यादा संवेदन से भरपूर है। 

इंटरनेट पे Iran Israel war impact on India यह लाइन महेश कोई सर्च टर्म नहीं रहा बल्कि एक बहुत बड़ा कूटनीतिक सवाल बन चुका है कि क्या फायदा पाकिस्तान या सभी देशों में इस युद्ध की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई कभी हो पाएगी क्या इसकी वजह से जो लोग इस दुनिया को छोड़कर चले गए हैं उनको न्याय मिल पाएगा? 

जाने ताजा घटनाक्रम से हो रही वैश्विक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति पर असर

कुछ वक्त पहले हुए हमले के बारे में दोनों देशों को जब पूछा गया तब दोनों देशों ने एक दूसरे पर ही सीता आरोप लगा दिया। इसराइल से जब इसके बारे में पूछा गया तो उसने सीधा Iran समर्थित समूह पर हमला करने की बात सामने रखी, और वहीं इसी के बारे में Iran ने इसे अपने सब प्रभुता पर हमला हमला हुआ यह बात बताई। 

इस युद्ध को लेकर कई यूरोपीय देश और अमेरिका ने शांति के लिए सामने अपील राखी। इस शांति के प्रस्ताव के बारे में और ईरान (Iran) इजरायल युद्ध को लेकर हर जगह चर्चा छाई है वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे के बारे में चर्चा की गई। और सिर्फ यही नहीं बल्कि कई खाड़ी क्षेत्र में सैन्य सतर्कता को भी बढ़ा दिया गया है। 

इस युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर काफी खतरे मंडरा रहे हैं जैसे कि तेल उत्पादक देश में बहुत गहरी चिंता छाई हुई है कि अगर यह युद्ध लंबे समय तक यूं ही अगर चला रहा तो Hormuz Strait जैसे बड़े समुद्री मार्ग इसके द्वारा प्रभावित हो सकते हैं। क्योंकि यह बिंदु वह बिंदु है जहां से दुनिया के सबसे बड़े हिस्से के crude oil prices के साथ जुड़े हुए कई सारे व्यापार गुजरते हैं । 

जाने इस वक्त क्या है भारत की स्थिति और India foreign policy की संतुलित रणनीति

इस घटनाक्रम को लेकर अगर हम भारत के प्रतिक्रिया की बात करें तो इस वक्त भारत बेहद शांत और संतुलित प्रतिक्रिया दे रहा है। PM Narendra Modi इस वक्त शांत है और शांति और संवाद पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। क्योंकि मोदी जी का मानना है कि भारत की आधिकारिक लाइन साफ है । कि अगर आपको कुछ नैतिक समाधान निकालना है तो तनाव कम होना चाहिए। तभी आप शांति से सो पाएंगे और इस प्रॉब्लम का समाधान ढूंढ पाएंगे। 

इसके अलावा अगर हम भारत के इसराइल और ईरान (Iran) देश के साथ संबंध की बात करें तो भारत देश के दोनों ही देश के साथ मजबूत रिलेशन है। क्योंकि भारत हमेशा से इसराइल से तकनीकी सहयोग और दक्ष को लेकर सहयोग लेट रहा है और ईरान (Iran) से राजनीतिक संपर्क जुड़ा हुआ है। 

अगर हम India Foreign Policy की बात कर तो इसका एक सिंपल मूल सिद्धांत है “राजनीतिक स्वायत्तता” । यानी कि इसका अर्थ है भारत किसी भी एक देश के पक्ष में खुलकर खड़ा नहीं हुआ है बल्कि इस वक्त भी भारत क्षेत्रीय स्थिरता की ही बात कर रहा है। विदेश के मंत्रालय ने बयान दिया है कि आदत स्थिति पर गरीबी तरीके से अपनी नजर गड्ढे हुए हैं और भारतीय नागरिक को की सुरक्षा को वह हमेशा ही सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।

Iran Israel war impact on India

रिपोर्टर्स और सूत्रों की माने तो उनके अनुसार पीएम मोदी जी ने कई वैश्विक नेता ऑन के साथ कॉल पर बात करी है और उनसे आवेदन किया है और क्षेत्र में जितना हो सके उतना जल्दी शांति की आवश्यकता दोहराई है। और सिर्फ यही नहीं बल्कि भारत ने बैंक चैनल कूटनीति के द्वारा संवाद बना रखने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। 

इस संवाद से भारत की चिंता साफ झलक रही है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्रीय स्थिरता और प्रवासी भारतीय जो कि यहां प्रवास के हेतु से आए हैं उनकी सुरक्षा हो सके। 

जाने Iran Israel war impact on India: क्या होंगी आर्थिक असर

  1. Crude Oil prices में हो रहा उछाल

हम सब लोग जानते हैं कि भारत अपनी बहुत तेज जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। Middle East crisis के बाद crude oil prices में बहुत ज्यादा तेजी देखने को मिल रही है 

अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो:

  • पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है
  • महंगाई बढ़ सकती है
  • चालू खाता घाटा प्रभावित हो सकता है

भारत ने हाल के वर्षों में रूस से सस्ता तेल खरीदा है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र अब भी ऊर्जा आपूर्ति का अहम स्रोत है।

2. शेयर बाजार और निवेश

भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखा गया। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़े। रक्षा और ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में हलचल देखी गई, जबकि एविएशन और आयात-आधारित उद्योगों पर दबाव बढ़ा।

3. व्यापार मार्गों पर असर

Red Sea और Persian Gulf के समुद्री मार्गों में अस्थिरता से भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकता है। अगर शिपिंग बीमा महंगा होता है, तो आयात-निर्यात की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

Gulf Indians safety: खाड़ी में रहे भारतीयों की चिंता

खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और ओमान में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय मौजूद हैं। भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो सरकार निकासी अभियान (evacuation plan) भी चला सकती है जैसा कि पहले यमन और यूक्रेन संकट के दौरान किया गया था।

Gulf Indians safety फिलहाल भारत सरकार की प्राथमिकता है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: India-Pakistan relations पर असर?

पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की है। पाकिस्तान के Iran से पारंपरिक धार्मिक और राजनीतिक संबंध रहे हैं, जबकि इज़राइल से उसके औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। हालांकि पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और आर्थिक संकट उसे सीमित प्रतिक्रिया देने पर मजबूर करते हैं।

India Pakistan relations के संदर्भ में देखा जाए तो यह संकट सीधे दोनों देशों के बीच टकराव का कारण नहीं बना है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता हमेशा कश्मीर और सीमा सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा देती है।

कश्मीर संदर्भ: क्या कोई सीधा प्रभाव?

अब तक कश्मीर को लेकर ईरान-इज़राइल संघर्ष से कोई प्रत्यक्ष सैन्य संबंध नहीं दिखा है, हालांकि अतीत में ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर बयान दिए हैं, लेकिन वर्तमान संकट में उसका फोकस इज़राइल के साथ टकराव पर है।

भारत के सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं ताकि किसी भी बाहरी समर्थन से सीमा पार गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।

भारत के लिए रणनीतिक संतुलन

India foreign policy की सबसे बड़ी चुनौती है।

  • इज़राइल के साथ रक्षा साझेदारी बनाए रखना
  • ईरान के साथ ऊर्जा और चाबहार परियोजना जारी रखना
  • अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ संतुलन

भारत बहुपक्षीय कूटनीति के जरिए इस Middle East crisis में “न्यूट्रल स्टेबल पावर” की छवि बनाए रखना चाहता है।

भविष्य की संभावनाएं

अगर संघर्ष सीमित रहता है, तो असर मुख्यतः तेल कीमतों और बाजार तक सीमित रहेगा।

लेकिन अगर यह व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलता है, तो:

  • वैश्विक मंदी का खतरा
  • ऊर्जा संकट
  • एशिया में सुरक्षा अस्थिरता

भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल है ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और घरेलू महंगाई नियंत्रण, खासकर बढ़ते crude oil prices के बीच।

निष्कर्ष

ईरान-इज़राइल युद्ध केवल पश्चिम एशिया का मुद्दा नहीं है। इसका प्रभाव वैश्विक है और दक्षिण एशिया भी इससे अछूता नहीं। Iran Israel war impact on India के तहत भारत को आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा तीनों स्तरों पर सतर्क रहना होगा। PM Modi और भारत सरकार फिलहाल संतुलित India foreign policy के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। 

पाकिस्तान ने भी संयमित प्रतिक्रिया दी है, जिससे India Pakistan relations पर तत्काल नकारात्मक असर नहीं दिख रहा। लेकिन अगर Middle East crisis लंबा खिंचता है, तो crude oil prices, महंगाई, और Gulf Indians safety जैसे मुद्दे भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। 

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीति इस आग को ठंडा कर पाती है या दुनिया एक और बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

sethsawariya193: